भारतीय सिनेमा की पारिवारिक फिल्मों के विषय में बताएँ |
इन फिल्मों की पहुँच भारतीय गाँव व शहर के साधारण दर्शकों तक रहती है। भारतीय सिनेमा में पारिवारिक फिल्मों की एक धारा लगातार चलती रही है। हल्के-फुल्के हास्य ओर एक परिवार की खट्टी-मीठी साफ़-सुथरी कहानियों को खूब पसंद किया जाता रहा है। इस तरह की फिल्मों में दर्शकों को बाँधने के लिये कथानक रोज़मर्रा की समस्याएं, मधुर संगीत, नृत्य और संस्कृति के कई आशय देखने को मिलते हैं।
अस्सी और नब्बे के दशक में बनी फार्मूला फिल्में कैसी होती थीं ?
अस्सी और नब्बे के दशक में बनी फिल्में, फिल्मकारों के लिये मुनाफ़ा कमाने का बड़ा हथियार थी।ऐसी फ़िल्मों के केन्द्र में रोमांस, हिंसा और ऐक्शन को रखा जाता था। इनका मक्सद केवल पैसा कमाना था। इन फ़िल्मों ने खासकर युवाओं के मन- मस्तिष्क पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है।
वर्तमान समय में सिनेमा के क्षेत्र में भारत की क्या स्तिथि है ?
वर्तमान समय में भारत सिनेमा के क्षेत्र में सबसे बड़ा फ़िल्म निर्माता देश बन गया है। हर साल लगभग 800 फिल्मों का निर्माण करता है परन्तु वर्तमान समय में सिनेमा अपने मूल उद्देश्यों से भटकता नज़र आ रहा है।































































































