Suggested Term - I Paper


Available Answers

  1. 1.

    निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—

    बाजार में एक जादू है। वह जादू आंख की तरह काम करता है। वह रूप का जादू है, पर जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है। जेब भरी हो और मन खाली हो ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है। जेब खाली हो पर मन भरा हो तो भी जादू चल जाएगा। मन खाली हो तो बाजार की अनेकानेक चीजों का निमंत्रण उस तक पहुंच जाएगा। कहीं उस वक्त जेब भरी हुई तब तो फिर वह मन किसका मानने वाला है! लगता है यह भी लूं, वह भी लूं। सभी कुछ जरूरी और आराम को बढ़ाने वाला मालूम होता है। पर यह सब जादू का असर है। जादू की सवारी उतरी कि पता चलता है कि फैंसी चीजों की बहुतायत आराम में मदद नहीं करती बल्कि हमारे आराम में खलल ही डालती है।

    प्रश्न 

    1. बाजार का असर सबसे ज्यादा कब होता है?
    2. फैंसी चीजें खरीदने से क्या होता है?
    3. बाजार और चुंबक में क्या समानता है?
    4. उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
    5. गद्यांश के अनुसार बाजार कैसे जाना चाहिए?
  2. 2.

    निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—

    शूरसेन प्रदेश में चित्रकेतु नामक एक राजा थे। उनकी अनेक रानियां थी, किंतु कोई संतान नहीं थी। एक दिन महर्षि अंगिरा राजभवन में पधारे। नरेश को संतान के लिए लालायित देख उन्होंने एक यज्ञ कराया, पर जाते समय कह गए— महाराज, आप पिता बनेंगे किंतु आपका पुत्र आपके हर्ष तथा शोक दोनों का कारण बनेगा। राजा को पुत्र प्राप्ति हुई। राजा पुत्र के स्नेहवश बड़ी रानी के भवन में अधिक समय बिताने लगे।फल यह हुआ कि दूसरी रानियां कुढ़ने लगी। उनकी ईर्ष्या इतनी बढ़ी कि उन्होंने उस अबोध शिशु को विष दे दिया। बालक मर गया। राजा विलाप करने लगे। तभी वहां देवर्षि नारद पधारे। चित्रकेतु अभी शोकमग्न थे। देवर्षि ने ताड़ लिया कि इनका मोह ऐसे दूर नहीं होगा। उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति के बल पर बालक के जिवात्म को आमंत्रित किया। जीवात्म के आ जाने पर उन्होंने कहा— देखो, ये तुम्हारे माता-पिता अत्यंत दुखी हो रहे हैं। तुम अपने शरीर में फिर प्रवेश करके इन्हें सुखी करो और राजसुख भोगो। उस जिवात्म ने कहा— देवर्षि, ये मेरे किस जन्म के माता-पिता हैं?  जीव का तो कोई माता-पिता या भाई-बंधु है नहीं। ये सब संबंध तो शरीर के हैं। शरीर छूटने के साथ ही सब संबंध टूट जाते हैं। राजा चित्रकेतु का मोह उसकी बातों को सुनकर नष्ट हो चुका था।

    प्रश्न 

    1. राजा चित्रकेतु के जीवन में किस चीज का अभाव था?
    2. जाने से पूर्व महर्षि ने राजा को क्या बताया?
    3. बालक की मृत्यु का क्या कारण था?
    4. नारद जी के प्रसंग का क्या उद्देश्य है?
    5. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
  3. 3.

    दिए गए वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए—

    1. जिसे जितना कठिन हो
    2. जो पुराण से संबंधित हो
    3. जो नियम से हो 
    4. जो देखने योग्य हो
  4. 4.

    निर्देशानुसार वाक्यों में परिवर्तन कीजिए—

    1. हम अपना कार्य समय पर करते हैं। (भविष्यत काल)
    2. चट्टोपाध्याय मंदिर के पीछे छिपे हैं। (भूतकाल)
  5. 5.

    दिए गए वाक्यों में 'कि' या 'की' का उचित प्रयोग कर रिक्त स्थान भरिए—

    1. सफलता ¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯ कोई सीमा नहीं।
    2. विचार करना चाहिए ¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯ आखिर हम क्या चाहते हैं।
  6. 6.

    निम्नलिखित वाक्य पढ़िए और बताइए कि ये अकर्मक है या सकर्मक—

    1. बढ़ती जनसंख्या ने तरह-तरह का प्रदूषण फैलाया।
    2. वृक्ष हमें जीवन देते हैं।
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