पर्यावरण, प्रदूषण और हम
“मुस्कराइये कि अभी आपका अस्तित्व है”
धरती हमारी माता है जो कि जीने के लिए हमे अपने अंदर से सब कुछ देती है और पर्यावरण हमारा पिता है जो कि बाहरी दिक्कतों से हमारी रक्षा करता है। धरती रूपी माता या पर्यावरण रूपी पिता पर अगर कुछ कष्ट आ जाए तो हमारा पूरा परिवार अर्थात प्रकृर्ति ही खतरे में आ जाएगी। प्रदूषण के कारण पर्यावरण मे असंतुलन हो रहा है। इससे न केवल जीवन प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इतना ही नहीं अब पर्यावरण प्रदूषण के कारण प्राकृतिक आपदाओं की वृद्धि हो रही है, जिसके कारण प्रचुर मात्रा में जन-धन की हानि हो रही है। पॉलिथीन/ प्लास्टिक प्रदूषण की वजह से धरती माता को दानव ने जकड़ लिया है और प्रदूषण ने पर्यावरण-पिता को हानि पहुचाना शुरू कर दिया है। भूमंडलीय ताप बढ़ रहा है, जिसके कारण हिमाच्छादित क्षेत्रों की काफी बर्फ पिघलने से भविष्य में समुद्रतल में वृद्धि होगी और महत्त्वपूर्ण तटीय क्षेत्र डूब जाएँगे। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण से अब जलवायु परिवर्तन का खतरा मँडरा रहा है, जिसके कारण कई जीव विलुप्त हो जाएँगे और खाद्य संकट की आशंका भी जताई जा रही है। हो सकता है कि एक दिन भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण डाइनोसोरस की तरह पृथ्वी से मानव भी विलुप्त हो जाएँ।
अतः इस पुस्तक में धरती माता और पर्यावरण पिता की समस्याओं को बताने और समझाने की कोशिश की गयी है, कि अभी भी थोड़ा समय है। हम संभाल जाएँ। इस पुस्तक का हर पाठ प्रदर्शित करता है कि पर्यावरण के रखरखाव और संतुलन में हमारा बहुत बड़ा योगदान है। पर्यावरण और पिता अध्याय में पर्यावरण को पिता तुल्य दर्शाया गया है जिस प्रकार हमारे जीवन के लिए पिता महत्वपूर्ण है ठीक उसी प्रकार पर्यावरण क्योंकि हमारा अस्तित्व इन दोनों की उपस्थिति पर निर्भर है।।
पर्यावरण और विकास अध्याय के अंतर्गत विकास के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी को दर्शाया गया है और हमारे वास्तविक ड्यूटी पर्यावरण के प्रति बताने का प्रयास कुछ विशेष पंक्तियों में निहित है।
जब विषय जीवन से जुड़ा हो तब हमारी सांसे और जल जैसे जरूरी तत्वों के प्रयोग के बिना रचना अधूरी रह जाती है। इसलिए इन दोनों की महत्ता को दर्शाने हेतु दो अध्याय 'सांसे हो रही है कम' तथा 'जल और जीवन' इस पुस्तक में दर्शाया गया है। साथ ही साथ हमें यह भी समझना बहुत जरूरी है कि हमारा रिश्ता पर्यावरण के साथ कैसा है और हमारे अस्तित्व का क्या मूल्य है? यह एहसास होते ही हमें अपने कर्तव्य का आभास होने लगता है और एक सुकून देह आवाज आती है अंतर्मन से मुस्कुराइए कि अभी आपका अस्तित्व है |
आगे के तीन विशेष अध्यायों (Environment & I, Citizenship & I, and Waste &I) में हमारा रिश्ता एक इकाई की तरह प्रदर्शित किया गया है। जिसका अपना अनमोल अस्तित्व है ।
प्रतिभा और प्लास्टिक प्रदूषण अध्याय एक अनुभव है मिशन "Beat Plastic Pollution" | इस विषय में प्लास्टिक रूपी दानव के बारे में चर्चा और उसके कहर से बच पाने का तरीका भी बताया गया है। लेखिका का अपना अनुभव इस क्षेत्र में विशेष रूप से है।
शीतल प्रथम आहार सोसाइटी पर्यावरण के हर कर्तव्य में पूर्णतः समर्पित संस्था है। अन्त में उसका विवरण और साथ में ऐसे महान कार्य में समर्पित लोगों के बारे में कुछ पंक्तियाँ है।
पुस्तक में कुछ उपाय भी बताएं गए हैं बाकी विस्तृत चर्चा और विवरण अगले विभिन्न विशेष अंशों में शीघ्र ही प्रकाशित किए जाएंगे, जिनको अपनाकर हम पर्यावरण को संतुलित कर सकते हैं और आने वाले भयंकर संकट से बच सकते है।
इस पुस्तक में जनसामान्य को ध्यान में रखते हुए साधारण शब्दों, कहानियों, कविताओं और आवश्यकतानुसार कई भाषाओं (अंग्रेजी, हिन्दी, संस्कृत) का चयन और प्रयोग किया गया है।
Contents
१ . पर्यावरण और पिता
२. Environment and I
३. पर्यावरण और विकास
४. Citizenship & I
५. साँसे हो रही है कम, आओ पेड़ लगाए हम
६. जल और जीवन
७. Waste & I
८. प्रतिभा और प्लास्टिक प्रदुषण
९. पर्यावरण और शीतल प्रथम आहार